“10 नहीं तो 5% ले लो…” जीतन राम मांझी के बयान से सियासत में भूचाल, संसद तक मचा हड़कंपकेंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक जीतन राम मांझी एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उनका बयान इतना तीखा और चौंकाने वाला है कि राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक खलबली मच गई है। मांझी ने खुले मंच से सांसदों पर कमीशन लेने का आरोप लगाते हुए ऐसा कुछ कह दिया, जिसने एनडीए की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।मांझी ने कहा कि “हर सांसद कमीशन लेता है, 10 प्रतिशत नहीं तो 5 प्रतिशत ही ले लो”। यहीं नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने खुद भी 40 प्रतिशत तक का कमीशन पार्टी फंड में दिया है। इस बयान के सामने आते ही सियासी हलकों में भूचाल आ गया। विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार पर हमला बोलने का बड़ा मुद्दा मिल गया है।गौरतलब है कि इससे पहले भी जीतन राम मांझी अपने बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं। राज्यसभा की सीट नहीं मिलने से नाराज होकर उन्होंने अपने बेटे संतोष मांझी को मंत्री पद छोड़ने की सलाह तक दे डाली थी। उस वक्त भी एनडीए के भीतर असहज स्थिति पैदा हो गई थी। अब सांसदों के कमीशन को “आम बात” बताकर मांझी ने विवाद को और गहरा कर दिया है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मांझी का यह बयान केवल व्यक्तिगत नाराजगी नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर चल रहे तनाव को भी उजागर करता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर ऐसे आरोप सही हैं, तो अब तक उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? वहीं, अगर ये बयान भावनात्मक या गुस्से में दिए गए हैं, तो इससे सरकार की छवि को नुकसान क्यों पहुंचाया जा रहा है?मांझी के इस बयान पर एनडीए की ओर से अब तक कोई स्पष्ट सफाई नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने बेचैनी जरूर बढ़ गई है। विपक्ष लगातार हमलावर है और जवाब की मांग कर रहा है।फिलहाल, जीतन राम मांझी का यह “बबाली बयान” आने वाले दिनों में सियासी बहस का बड़ा केंद्र बनने वाला है। सवाल यही है—यह सिर्फ बयानबाजी है या सिस्टम पर बड़ा खुलासा?

