बिहार की एनडीए राजनीति में एक बार फिर आपसी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। इस बार विवाद की जड़ बना है राज्यसभा सीट और इसे लेकर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के संरक्षक जीतन राम मांझी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा आमने-सामने खड़े दिख रहे हैं।
दरअसल, जीतन राम मांझी ने हाल ही में अपने बेटे और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन को नसीहत दी थी कि वे आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी से एक सीट की मांग करें। मांझी का दावा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से राज्यसभा में एक सीट देने का आश्वासन दिया गया था। मांझी ने साफ कहा था कि अगर वादा पूरा नहीं हुआ तो उनकी पार्टी अपनी राह खुद चुनने से पीछे नहीं हटेगी।
इस बयान के बाद राजनीतिक तापमान और चढ़ गया। जवाब में उपेंद्र कुशवाहा ने अप्रत्यक्ष तौर पर मांझी को नसीहत दी, लेकिन इस पर जीतन राम मांझी और आक्रामक हो गए। जहानाबाद में दिए बयान में मांझी ने कुशवाहा पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “उपेंद्र कुशवाहा क्यों नहीं बोलेंगे? खुद राज्यसभा सांसद हैं, पत्नी विधायक बन गई और बेटा मंत्री है, तो वह तो बोलेंगे ही।”
मांझी यहीं नहीं रुके। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती और मान्यता मिले, और इसी लक्ष्य को लेकर वे लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इसी राजनीतिक संघर्ष का नतीजा है कि ऐसे बयान सामने आ रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो मांझी और कुशवाहा के इस खुले टकराव ने यह संकेत दे दिया है कि एनडीए के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। सीटों की हिस्सेदारी और भविष्य की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह खींचतान एनडीए की एकजुटता के लिए कितनी चुनौती बनती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

