बिहार की सियासत में एक बार फिर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को लेकर बड़ी चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के भीतर विधायकों की बगावत और टूट की खबरों के बीच यह नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। कहा जा रहा है कि बेटे को नीतीश कैबिनेट में मंत्री बनाए जाने के बाद अब उपेंद्र कुशवाहा की नजर अपनी बहू साक्षी मिश्रा पर टिकी हुई है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उपेंद्र कुशवाहा अपनी बहू साक्षी मिश्रा को बिहार नागरिक परिषद का उपाध्यक्ष बनवाने की कोशिश में जुटे हैं। इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में जोरों से चर्चा है। दिलचस्प बात यह है कि पार्टी के चार में से तीन विधायकों के बागी रुख के बावजूद उपेंद्र कुशवाहा की सक्रियता और रणनीति पर इसका कोई खास असर नहीं दिख रहा है।
दरअसल, हालिया विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा ने मधुबनी सीट से माधव आनंद को उम्मीदवार बनाया था। चुनाव में उनकी जीत के बाद बिहार नागरिक परिषद के उपाध्यक्ष का पद रिक्त हो गया है। अब इसी खाली पद को लेकर नई राजनीतिक जोड़-तोड़ शुरू हो गई है। चर्चा है कि इस पद पर साक्षी मिश्रा को बैठाने की कवायद तेज हो चुकी है।
पार्टी के एक बागी विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया है कि साक्षी मिश्रा के नाम का प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी तक भेजा जा चुका है। हालांकि इस पर अभी तक किसी आधिकारिक स्तर पर पुष्टि नहीं की गई है। बावजूद इसके, सियासी गलियारों में इसे लेकर अटकलें लगातार तेज होती जा रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा के भीतर असंतोष को और उजागर कर दिया है। एक ओर जहां विधायकों की नाराजगी पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर नेतृत्व पर परिवारवाद को बढ़ावा देने के आरोप भी लगने लगे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि उपेंद्र कुशवाहा की यह रणनीति सियासी तौर पर कितना असर दिखाती है।

