गया रेल थाना क्षेत्र में सामने आए एक किलो सोना लूट कांड ने रेल पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। हावड़ा–जोधपुर एक्सप्रेस में हुई इस सनसनीखेज वारदात में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि लूट की साजिश किसी बाहरी गिरोह ने नहीं, बल्कि खुद गया रेल थानाध्यक्ष ने रची थी। प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने के बाद थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया है। उनके साथ चार अन्य सिपाहियों पर भी कार्रवाई की गाज गिरी है।

रेल पुलिस के अनुसार, 21 नवंबर को हावड़ा–जोधपुर एक्सप्रेस में कोडरमा–गया रेलखंड के बीच करीब एक किलो सोना लूटा गया था, जिसकी कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने पहले अपने ही बयान पर केस दर्ज कराया और बाद में वही लूट की साजिश में शामिल पाए गए।
जांच में यह भी सामने आया है कि गया रेल थाना के सिपाही करण कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, रंजय कुमार और आनंद मोहन ने अपने पद और अधिकार का दुरुपयोग करते हुए इस लूट को अंजाम दिया। सभी को निलंबित करते हुए लूट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है।
सूत्रों के मुताबिक, गया रेल पुलिस का क्षेत्राधिकार कोडरमा तक नहीं है, इसके बावजूद थानाध्यक्ष और उनके सहयोगी निजी व्यक्ति परवेज आलम तथा पूर्व चालक सीताराम के साथ कोडरमा पहुंचे। सूचना थी कि कानपुर के सोना कारोबारी मनोज सोनी के कर्मचारी धनंजय शाश्वत सोना लेकर यात्रा कर रहे हैं। योजना के तहत पीड़ित को ट्रेन से जबरन उतारकर मारपीट की गई और सोने की बिस्किट लूट ली गई।
घटना की जानकारी खगड़िया के सांसद राजेश वर्मा द्वारा दिए जाने के बाद पटना रेल एसपी ने तीन डीएसपी की एसआईटी गठित की, जिसकी जांच में पूरा मामला उजागर हुआ। थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मियों के निलंबन से रेल पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। अब यात्रियों की सुरक्षा और पुलिस की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
