
पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और मौत के मामले में जांच ने अब नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है। प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल की प्रारंभिक मेडिकल रिपोर्ट और पीएमसीएच (PMCH) में हुए पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में भारी विरोधाभास सामने आया है। एक ओर अस्पताल की रिपोर्ट में यौन हिंसा के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने यौन शोषण और जबरदस्त हिंसा की पुष्टि कर दी है, जिससे पूरे मामले पर बहस तेज हो गई है।
प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल की रिपोर्ट के अनुसार छात्रा को 6 जनवरी 2026 की शाम करीब 7:40 बजे इमरजेंसी में लाया गया था। उस समय उसकी हालत बेहद नाजुक थी। रिपोर्ट में बताया गया कि छात्रा लगभग छह घंटे से बेहोशी की स्थिति में थी, उसकी सांसें कमजोर हो रही थीं और ऑक्सीजन लेवल लगातार गिर रहा था। आंखों की पुतलियां सिकुड़ी हुई थीं और दिमाग ठीक से प्रतिक्रिया नहीं कर रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत उसे ICU में शिफ्ट किया, जहां समय पर इलाज न मिलने पर जान जाने का खतरा बताया गया।
मेडिकल रिकॉर्ड में यह भी उल्लेख है कि ड्रग स्क्रीनिंग टेस्ट पॉजिटिव आया था। डॉक्टरों ने इसे संदिग्ध ड्रग पॉइजनिंग का मामला बताया और कहा कि नशीली दवाओं के असर से दिमाग और नसों की गतिविधि धीमी हो गई थी, जिससे सांस लेने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि नशीला पदार्थ छात्रा ने खुद लिया या उसे जबरन दिया गया।
जांच में ब्रेन से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी सामने आईं। CT स्कैन में दिमाग में सूजन और निचले हिस्से में हल्का ब्लड क्लॉट पाया गया। इसके अलावा चेस्ट एक्स-रे में दाहिने फेफड़े में निमोनिया के लक्षण मिले, जिसके कारण छात्रा को वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। खून की जांच में लिवर एंजाइम बढ़े हुए पाए गए।साथ ही, कोर्टिसोल लेवल बेहद ज्यादा था, जो गंभीर मानसिक आघात या ड्रग ओवरडोज की ओर इशारा करता है।
हालांकि प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल की रिपोर्ट में दुष्कर्म से जुड़ी स्पष्ट चोटों या गंभीर ब्लीडिंग का जिक्र नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने मामले को मेडिको-लीगल मानते हुए पुलिस को सूचना देने की बात कही, लेकिन मीडिया से बातचीत करने से इनकार कर दिया।
इसके उलट, PMCH में गठित मेडिकल बोर्ड की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले को पलट दिया। पोस्टमॉर्टम में छात्रा के शरीर पर कई ताजा और गंभीर चोटें पाई गईं। गर्दन, कंधे और छाती पर नाखूनों से बने गहरे घाव मिले, जो संघर्ष के स्पष्ट संकेत माने जाते हैं। पीठ पर नीले निशान और शरीर पर खरोंच यह दर्शाते हैं कि छात्रा ने खुद को बचाने की कोशिश की और संघर्ष काफी देर तक चला।
सबसे गंभीर खुलासा जननांग की जांच में हुआ, जहां ताजा और गहरी चोटों के साथ रगड़ के निशान और ब्लीडिंग पाई गई। मेडिकल बोर्ड ने इसे जबरन शारीरिक संबंध का मामला बताया और साफ लिखा कि यह सहमति से बना संबंध नहीं है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा की स्पष्ट पुष्टि की गई है। मौत के कारणों की गहराई से जांच के लिए विसरा सुरक्षित रखकर रिपोर्ट दिल्ली एम्स भेजी गई है।
इस पूरे मामले पर ADG CID पारसनाथ ने आज बताया कि FSL की टीम ने हॉस्टल सहित सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की है और दो से तीन दिनों में अहम रिपोर्ट आने की संभावना है। शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम में आए इस बड़े अंतर ने जांच एजेंसियों के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अब आगे की जांच से ही सामने आएगा।
