देश के विभिन्न हिस्सों में निपाह वायरस के मामलों को देखते हुए अब तमिलनाडु सरकार भी पूरी तरह सतर्क हो गई है। पश्चिम बंगाल और झारखंड में बढ़ते मामलों के बाद दक्षिण भारत में चिंता और सतर्कता दोनों बढ़ गई हैं। तमिलनाडु में स्वास्थ्य विभाग ने हाई अलर्ट जारी करते हुए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सरकारी अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मा. सुब्रमण्यन के अनुसार, किसी भी संदिग्ध मामले की तुरंत पहचान और रिपोर्टिंग के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने पूरे राज्य में एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) की निगरानी तेज कर दी है। निपाह वायरस को अत्यंत खतरनाक माना जाता है, क्योंकि इसकी मृत्यु दर औसतन 75 प्रतिशत तक बताई जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर मामलों में यह मृत्यु दर 100 प्रतिशत तक भी पहुंच सकती है। ऐसे में समय पर पहचान और आइसोलेशन ही सबसे बड़ा बचाव है।
निपाह वायरस को लेकर हाई अलर्ट के निर्देश
राज्य सरकार ने स्वास्थ्य तंत्र को सतर्क करते हुए कई अहम निर्देश जारी किए हैं। इनमें मरीजों की जल्द पहचान करना, हाल ही में बाहर से यात्रा कर आए लोगों का पूरा ट्रैवल हिस्ट्री लेना, और किसी भी संदिग्ध मरीज की जानकारी तुरंत सरकारी पोर्टल IDSP-IHIP पर अपलोड करना शामिल है। इसके साथ ही अस्पतालों में आइसोलेशन की व्यवस्था और स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
निपाह वायरस कैसे फैलता है
निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। इसका प्रमुख स्रोत फ्रूट बैट्स (Pteropus प्रजाति) माने जाते हैं। यह वायरस संक्रमित फल खाने, दूषित ताड़ी पीने या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैल सकता है। कोरोना की तरह यह वायरस भी मानव-से-मानव संपर्क से फैलने की क्षमता रखता है, जिससे इसका खतरा और बढ़ जाता है।
दक्षिण भारत में ज्यादा मामले क्यों
हालांकि निपाह वायरस सिर्फ दक्षिण भारत तक सीमित नहीं है, लेकिन यहां इसके मामले अपेक्षाकृत ज्यादा देखे जाते हैं। इसके पीछे कई कारण माने जाते हैं, जैसे जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई, ताजे फलों और ताड़ी का अधिक सेवन, घनी आबादी और प्रकृति के साथ निकट संपर्क। इसके अलावा केरल और आसपास के राज्यों में मजबूत हेल्थकेयर सिस्टम के कारण मामलों की पहचान और रिपोर्टिंग भी जल्दी हो जाती है।
निष्कर्ष
निपाह वायरस को हल्के में लेना बेहद खतरनाक हो सकता है। सरकार की सतर्कता और आम लोगों की जागरूकता ही इस जानलेवा वायरस से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी प्रकार के इलाज या दवा के लिए योग्य डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
