प्रखंड विकल्प प्रक्रिया में आ रही तकनीकी बाधा, विभाग से शीघ्र समाधान की मांग

शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में 5218 प्रधान शिक्षकों का जिला आवंटन किया गया है। यह प्रक्रिया लंबी प्रतीक्षा के बाद पूरी हुई, जिससे अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जगी थी। विभागीय निर्देश के अनुसार अब इन सभी चयनित प्रधान शिक्षकों को ई-शिक्षा पोर्टल पर लॉग-इन कर पाँच प्रखंडों का विकल्प देना है, ताकि आगे की पदस्थापन प्रक्रिया पूरी की जा सके।
लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में प्रधान शिक्षक अभ्यर्थी जब ई-शिक्षा पोर्टल पर जाकर प्रखंड विकल्प भरने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्हें नया आवंटित जिला दिखाई ही नहीं दे रहा। पोर्टल पर अभी भी वही पुराना जिला दिख रहा है, जिस जिले को अभ्यर्थियों ने पहले छोड़ दिया था और जहां उन्होंने योगदान (ज्वाइन) नहीं किया था।
इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण चयनित प्रधान शिक्षक अभ्यर्थी गंभीर असमंजस में हैं। एक ओर विभाग द्वारा समयबद्ध तरीके से प्रखंड विकल्प भरने का निर्देश है, वहीं दूसरी ओर पोर्टल पर गलत जिला प्रदर्शित होने से वे अपनी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। इससे यह आशंका भी बनी हुई है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो अभ्यर्थियों को अनावश्यक देरी, भ्रम और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने पुराने जिले में योगदान नहीं किया था और उसी आधार पर उन्हें नए जिले का आवंटन किया गया है। ऐसे में ई-शिक्षा पोर्टल पर पुराने जिले का दिखना न सिर्फ तकनीकी त्रुटि है, बल्कि पूरी पदस्थापन प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला मुद्दा भी है।
प्रधान शिक्षक अभ्यर्थियों और शिक्षक संगठनों की ओर से शिक्षा विभाग से यह आग्रह किया जा रहा है कि वह शीघ्र हस्तक्षेप करते हुए ई-शिक्षा पोर्टल पर सभी 5218 प्रधान शिक्षकों का नया आवंटित जिला तत्काल अपडेट कराए। इससे अभ्यर्थी बिना किसी बाधा के अपने-अपने पाँच प्रखंडों का विकल्प भर सकेंगे और आगे की प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेगी।
यह मामला केवल तकनीकी सुधार का नहीं, बल्कि हजारों शिक्षकों के भविष्य और प्रशासनिक पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। अतः बिहार शिक्षा विभाग और राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वे इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए त्वरित समाधान सुनिश्चित करें, ताकि प्रधान शिक्षक अभ्यर्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और शिक्षा व्यवस्था में अनावश्यक अव्यवस्था उत्पन्न न हो।
