पटना के शंभू हॉस्टल कांड संख्या 14/26 की जांच में एक अहम और संवेदनशील मोड़ सामने आया है। इस मामले में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की प्रारंभिक रिपोर्ट ने जांच की दिशा को और स्पष्ट कर दिया है। पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मृतका के परिजनों ने 10 जनवरी 2026 को मृतका के कुछ वस्त्र पुलिस को सौंपे थे। इन वस्त्रों को विधि-सम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए जब्त किया गया और वैज्ञानिक परीक्षण के लिए एफएसएल भेजा गया।
एफएसएल द्वारा किए गए परीक्षण के दौरान कथित रूप से घटना के समय पहने गए एक अंतःवस्त्र से मानव शुक्राणु के अवशेष पाए गए हैं। यह खोज मामले को अत्यंत गंभीर बनाती है। फिलहाल एफएसएल द्वारा उक्त नमूनों की डीएनए प्रोफाइल तैयार की जा रही है, ताकि सटीक निष्कर्ष तक पहुंचा जा सके। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, डीएनए प्रोफाइल तैयार होने के बाद इसकी तुलना अग्रतर अनुसंधान के क्रम में गिरफ्तार अभियुक्त के डीएनए से की जाएगी। इसके साथ ही विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा चिन्हित अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के डीएनए नमूनों से भी मिलान कराया जाएगा।
इस मामले की समीक्षा के दौरान पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। वरीय पुलिस अधीक्षक, पटना के कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि कांड की समीक्षा के क्रम में कदमकुआं थाना के अपर थानाध्यक्ष सह अवर निरीक्षक हेमंत झा एवं चित्रगुप्तनगर थाना की थानाध्यक्ष अवर निरीक्षक रोशनी कुमारी पर गंभीर आरोप पाए गए हैं। दोनों अधिकारियों पर आसूचना संकलन में लापरवाही और समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं करने का आरोप है।
इन आरोपों को गंभीर मानते हुए दोनों पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस विभाग में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस संवेदनशील मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
फिलहाल पूरे मामले की जांच SIT की निगरानी में आगे बढ़ रही है। पुलिस का दावा है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जा रही है, ताकि मृतका को न्याय मिल सके और दोषियों को कानून के कठघरे में लाया जा सके। मामले पर आगे की कार्रवाई एफएसएल की अंतिम रिपोर्ट और डीएनए मिलान के परिणामों पर निर्भर करेगी।

