पटना के चर्चित नीट छात्रा मौत मामले ने अब सियासी रंग ले लिया है। स्थानीय पुलिस की जांच से संतोषजनक नतीजा नहीं निकलने के बाद बिहार सरकार ने इस संवेदनशील केस को सीबीआई को सौंप दिया है। जैसे ही जांच केंद्रीय एजेंसी को हस्तांतरित हुई, मामला राज्य से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। पटना से दिल्ली तक जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गई है और पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों की नजर टिकी हुई है।

इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी ने गुरुवार को बड़ा बयान देकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी। उन्होंने दावा किया कि इस संदिग्ध मौत के पीछे किसी प्रभावशाली मंत्री या उनके बेटे का हाथ हो सकता है। राबड़ी देवी के इस आरोप ने सत्ता पक्ष को कठघरे में खड़ा कर दिया है और विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का मौका मिल गया है।
राबड़ी देवी ने यह भी कहा कि शुरुआत में मामले को दबाने की कोशिश की गई। उनका आरोप है कि जब तक जनदबाव नहीं बढ़ा, तब तक सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई। विपक्ष का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच होती तो कई सवालों के जवाब अब तक मिल चुके होते। विपक्षी दलों ने आशंका जताई है कि जांच में देरी से सबूतों के साथ छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर, सत्ता पक्ष ने राबड़ी देवी के आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक करार दिया है। सरकार के प्रवक्ताओं का कहना है कि सीबीआई जांच का फैसला पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है, न कि किसी दबाव में। उनका दावा है कि जांच एजेंसी स्वतंत्र रूप से काम करेगी और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल पूरे मामले की निगाहें सीबीआई जांच पर टिकी हैं। छात्रा की मौत के पीछे की सच्चाई क्या है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। लेकिन इतना तय है कि इस प्रकरण ने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गर्मा सकता है।
