
Desk ASR
बिहार में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए नीतीश सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों पर खास फोकस किया है। इसी कड़ी में राज्य में तेल मिल लगाने वाले उद्यमियों को बंपर अनुदान देने की योजना पर काम तेज कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल स्थानीय स्तर पर उद्योग स्थापित होंगे, बल्कि किसानों की आमदनी और ग्रामीण रोजगार भी बढ़ेगा।
सूत्रों के अनुसार, सरसों, सूरजमुखी, मूंगफली और सोयाबीन जैसी तिलहनी फसलों के प्रसंस्करण के लिए नई तेल मिल इकाइयों को पूंजी निवेश पर विशेष सब्सिडी दी जाएगी। मशीनरी, भवन निर्माण और तकनीकी उन्नयन पर भी अनुदान का प्रावधान रखा गया है। खास बात यह है कि यह योजना छोटे और मध्यम उद्यमियों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है, ताकि स्थानीय लोग भी उद्योग जगत में कदम रख सकें।
सरकार का उद्देश्य है कि बिहार में उत्पादित तिलहन का प्रसंस्करण राज्य के भीतर ही हो, जिससे बाहर के राज्यों पर निर्भरता कम हो। इससे परिवहन लागत घटेगी और स्थानीय ब्रांड को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, तेल मिलों के आसपास पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और मार्केटिंग से जुड़े सहायक उद्योग भी विकसित होंगे।उद्योग विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अनुदान नीति को सरल और पारदर्शी बनाया जा रहा है, ताकि निवेशकों को किसी तरह की परेशानी न हो। ऑनलाइन आवेदन और सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए मंजूरी की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पहल बिहार को कृषि आधारित उद्योगों का बड़ा केंद्र बना सकती है। तेल मिल उद्योग में निवेश से राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में यह योजना बिहार के औद्योगिक नक्शे को बदलने वाली साबित हो सकती है।
