
Desk ASR
बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने आगामी पंचायत चुनाव को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ करते हुए चुनावी प्रक्रिया की रूपरेखा स्पष्ट कर दी है। आयोग ने साफ कर दिया है कि इस बार पंचायत चुनाव आरक्षण रोस्टर प्रणाली के तहत ही कराए जाएंगे, ताकि सभी वर्गों को समान और पारदर्शी प्रतिनिधित्व मिल सके।

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के पदों पर आरक्षण का निर्धारण तय रोस्टर के आधार पर होगा। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का चक्रानुक्रम (रोटेशन) लागू किया जाएगा। इससे पहले जिन सीटों पर आरक्षण था, अगली बार वही सीट आरक्षित रहेगी या नहीं—यह रोस्टर से तय होगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरक्षण रोस्टर का प्रकाशन चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले कर दिया जाएगा, ताकि प्रत्याशियों और मतदाताओं को किसी तरह का भ्रम न रहे। इसके साथ ही मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नाम जोड़ने-हटाने और सुधार की प्रक्रिया को भी समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए आयोग ने जिला प्रशासन और पुलिस को अभी से तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील बूथों की पहचान, मतदान कर्मियों का प्रशिक्षण और ईवीएम/मतपेटी की व्यवस्थाओं पर विशेष जोर दिया जाएगा।
राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य पंचायत स्तर पर लोकतंत्र को और मजबूत करना है। आरक्षण रोस्टर प्रणाली से न सिर्फ सामाजिक संतुलन बनेगा, बल्कि नए नेतृत्व को भी आगे आने का अवसर मिलेगा। अब सभी की निगाहें चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे पंचायत चुनाव की सियासी सरगर्मी तेज होने की पूरी संभावना है।
