बिहार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बेहतर रणनीति, तकनीक और इच्छाशक्ति के दम पर बड़े बदलाव संभव हैं। राज्य की आपातकालीन सेवा डायल 112 ने रिस्पॉन्स टाइम के मामले में देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया है। अब किसी भी इमरजेंसी कॉल पर औसतन महज 12 मिनट में पुलिस मदद मौके पर पहुंच रही है, जो बिहार जैसे बड़े और विविध भौगोलिक राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
डायल 112 सेवा को मजबूत बनाने के लिए बिहार पुलिस ने बीते कुछ वर्षों में कई अहम कदम उठाए हैं। आधुनिक कंट्रोल रूम, जीपीएस से लैस वाहन, प्रशिक्षित कॉल हैंडलर और रिस्पॉन्स टीमों की संख्या में बढ़ोतरी ने इस सिस्टम को तेज और प्रभावी बनाया है। खास बात यह है कि शहरी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी रिस्पॉन्स टाइम में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
आंकड़ों के मुताबिक, डायल 112 पर मिलने वाली कॉल्स में घरेलू हिंसा, सड़क दुर्घटना, महिलाओं की सुरक्षा, झगड़ा, चोरी और अन्य आपात स्थितियां शामिल रहती हैं। पहले जहां लोगों को पुलिस के आने में लंबा इंतजार करना पड़ता था, अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। समय पर पहुंचने वाली टीम न सिर्फ हालात को संभाल रही है, बल्कि अपराध पर नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सफलता टीमवर्क और तकनीकी सुधार का नतीजा है। फील्ड यूनिट्स को रियल-टाइम लोकेशन के आधार पर भेजा जाता है, जिससे समय की बचत होती है। साथ ही, लगातार मॉनिटरिंग और फीडबैक सिस्टम से रिस्पॉन्स की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है।
आम नागरिकों में भी डायल 112 को लेकर भरोसा बढ़ा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यही रफ्तार और पारदर्शिता बनी रही, तो बिहार जल्द ही इस श्रेणी में देश का नंबर-1 राज्य बन सकता है। डायल 112 की यह उपलब्धि न सिर्फ पुलिसिंग में सुधार का संकेत है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कदम भी है।

