कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ नेता शशि थरूर के एक बयान ने बिहार की राजनीति के साथ-साथ कांग्रेस के भीतर भी हलचल बढ़ा दी है। नालंदा साहित्य महोत्सव में हिस्सा लेने बिहार पहुंचे थरूर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार और राज्य में हुए बुनियादी विकास कार्यों की खुलकर सराहना की। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू और बीजेपी गठबंधन की सरकार है—यानी कांग्रेस की सीधी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी।
एक टीवी चैनल से बातचीत में शशि थरूर ने कहा कि बिहार का इंफ्रास्ट्रक्चर पहले की तुलना में काफी बेहतर हुआ है। उन्होंने सड़कों की हालत, बिजली-पानी की व्यवस्था और रात के समय भी सड़कों पर लोगों की मौजूदगी को बदलाव का बड़ा संकेत बताया। थरूर के मुताबिक, पहले जो असुरक्षा और अव्यवस्था दिखती थी, वह अब काफी हद तक दूर हुई है।
जब उनसे सीधे नीतीश कुमार की भूमिका पर सवाल किया गया, तो थरूर ने राजनीति से दूरी बनाते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक बहस में न घसीटा जाए। हालांकि उन्होंने यह जरूर जोड़ा कि हाल के वर्षों में बिहार में कई सकारात्मक काम हुए हैं और इसका श्रेय जनता और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों को मिलना चाहिए।
थरूर का यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे पहले वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुछ नीतियों और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका की तारीफ कर चुके हैं। उनकी ऐसी टिप्पणियों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व असहज महसूस करता रहा है। हालांकि थरूर हमेशा यह स्पष्ट करते आए हैं कि उनकी राय किसी पार्टी लाइन से नहीं, बल्कि देशहित की सोच से प्रेरित होती है।
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले शशि थरूर ने हिजाब विवाद को लेकर नीतीश कुमार की आलोचना भी की थी। ऐसे में उनकी यह नई टिप्पणी यह संकेत देती है कि वे मुद्दों को दलगत चश्मे से नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत के आधार पर देखते हैं। बिहार को लेकर कही गई यह बात न सिर्फ सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गई है, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी नई बहस को जन्म दे सकती है।

