हेडर: बिहार में माफियाओं पर बड़ा वार, 55 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्ती की तैयारी
बिहार में माफियाओं के खिलाफ सरकार अब आर-पार के मूड में नजर आ रही है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सख्त एलान के बाद जमीन, बालू और शराब माफियाओं पर कार्रवाई तेज कर दी गई है। सरकार की मंशा साफ है—अवैध कमाई करने वालों की संपत्ति जब्त कर कानून का सख्त संदेश देना।
इसी कड़ी में पहले चरण की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने 20 कुख्यात माफियाओं की करीब 55 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों को जब्त करने का प्रस्ताव प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भेज दिया है। बताया जा रहा है कि यह संपत्तियां जमीन कारोबार, बालू खनन और शराब तस्करी से अर्जित की गई थीं।
सूत्रों के अनुसार, जिन नामों को इस सूची में शामिल किया गया है, उनमें कई प्रभावशाली और लंबे समय से विवादों में रहे लोग हैं। इस प्रस्ताव में राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व विधायक रीतलाल यादव के भाई का नाम भी शामिल बताया जा रहा है, जिससे सियासी हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। हालांकि, जांच एजेंसियां इसे पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया बताते हुए किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव से इनकार कर रही हैं।
ईओयू की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट में बैंक खातों, अचल संपत्तियों, कंपनियों में हिस्सेदारी और महंगे वाहनों का ब्यौरा शामिल है। ईडी अब मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत आगे की कार्रवाई करेगी। जरूरत पड़ने पर कुर्की और जब्ती की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा।
सरकार का दावा है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में माफिया नेटवर्क से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही साफ कर चुके हैं कि अपराध और अवैध कारोबार के लिए बिहार में अब कोई जगह नहीं होगी।
इस सख्त कार्रवाई को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार की बड़ी पहल माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों पर साफ दिख सकता है।

