बिहार में सरकारी विद्यालयों में चलने वाली मध्यान्ह भोजन योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राज्य के 13 जिलों में मिड-डे मील से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसमें लाखों बच्चों की थाली से जुड़ी योजना में भारी वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि योजना के तहत आवंटित राशि का सही उपयोग नहीं किया गया और कागजों में फर्जी खर्च दिखाकर सरकारी धन की बंदरबांट की गई।
शिक्षा विभाग की ओर से कराई गई ऑडिट और जांच रिपोर्ट में करीब 1 करोड़ 92 लाख रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई है। इस पूरे मामले में संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापक सीधे तौर पर शक के घेरे में आ गए हैं। विभाग का मानना है कि बिना प्रधानाध्यापक की जानकारी और सहमति के इतनी बड़ी राशि का दुरुपयोग संभव नहीं है।
शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि जिन विद्यालयों में अनियमितता पाई गई है, वहां के प्रधानाध्यापकों से पूरी राशि की वसूली की जाएगी। इसके साथ ही विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। दोषी पाए जाने पर निलंबन से लेकर सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ जिलों में बच्चों की वास्तविक उपस्थिति से अधिक संख्या दिखाकर भोजन की राशि निकाली गई, तो कहीं गुणवत्ताहीन भोजन पर पूरा भुगतान दिखाया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि कई जगहों पर आपूर्तिकर्ताओं और स्कूल स्तर पर मिलीभगत की आशंका है।
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मिड-डे मील योजना की सख्त निगरानी करें और भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का कहना है कि बच्चों के हक से खिलवाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई तय है। यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि भरोसे के साथ की गई बड़ी धोखाधड़ी को भी उजागर करता है।

