
बिहार के रोहतास जिले में पर्यटन को नई ऊंचाई देने का सपना शुक्रवार को उस वक्त लड़खड़ा गया, जब रोहतासगढ़ किला और रोहितेश्वर धाम के बीच बन रहे रोपवे का ट्रायल अचानक हादसे में बदल गया। कैमूर पहाड़ी क्षेत्र में ट्रायल के दौरान रोपवे के पिलर धंस गए और पूरा ढांचा गिर पड़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी तरह की जनहानि या जानमाल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन अफरा-तफरी का माहौल जरूर बन गया।
करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा यह रोपवे प्रोजेक्ट रोहतासगढ़ किले जैसे ऐतिहासिक धरोहर और रोहितेश्वर धाम जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल को जोड़ने के लिए बनाया गया था। उद्देश्य था कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को कठिन पहाड़ी रास्तों से राहत मिले और कुछ ही मिनटों में दोनों स्थलों के बीच यात्रा संभव हो सके। नए साल में इसके औपचारिक उद्घाटन की तैयारी चल रही थी और ट्रायल उसी कड़ी का हिस्सा था।
घटना के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है और उसे 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। शुरुआती तौर पर निर्माण गुणवत्ता, पिलर की मजबूती और तकनीकी मानकों के पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
गौरतलब है कि रोपवे निर्माण कार्य की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई थी और इसे 2023 तक पूरा किया जाना था। लेकिन विभिन्न कारणों से परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी। अब जबकि 2026 में इसके शुरू होने की संभावना जताई जा रही थी, यह हादसा उस उम्मीद पर भी सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में निराशा है। उनका कहना है कि यह परियोजना न सिर्फ पर्यटन बल्कि स्थानीय रोजगार के लिहाज से भी अहम थी। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि यह हादसा लापरवाही का नतीजा था या किसी बड़ी तकनीकी चूक का।
