बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने की दिशा में नीतीश सरकार ने अहम कदम उठाया है। मधुबनी जिले की सकरी और दरभंगा जिले की रैयाम चीनी मिल को सहकारिता विभाग के माध्यम से दोबारा संचालित करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का मानना है कि सहकारी मॉडल के जरिए न सिर्फ चीनी उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय किसानों और रोजगार से जुड़े लोगों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

सहकारिता और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि दोनों चीनी मिलों के संचालन को लेकर विभागीय स्तर पर कार्य योजना तैयार की जा रही है। प्रस्ताव के अनुसार, इन मिलों का संचालन सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाएगा। हालांकि, इस योजना को अमल में लाने से पहले राज्य कैबिनेट की स्वीकृति जरूरी होगी। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही सहकारी समितियों के गठन और आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि लंबे समय से बंद पड़ी इन मिलों के चालू होने से उत्तर बिहार के गन्ना किसानों को सीधा फायदा होगा। किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिलेगा और परिवहन जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
इसी क्रम में मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से धान खरीद का लक्ष्य बढ़ाकर 45 लाख टन करने का अनुरोध किया है। इस मांग पर केंद्र से सकारात्मक संकेत मिले हैं, जिससे किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने का अधिक अवसर मिल सकता है।
विभागीय बैठक के दौरान सचिव धर्मेंद्र सिंह, अपर सचिव अभय कुमार सिंह और संयुक्त सचिव कामेश्वर ठाकुर भी मौजूद थे। अधिकारियों के साथ मिलकर मिलों के पुनरुद्धार की रूपरेखा पर चर्चा की गई।
कुल मिलाकर, सहकारिता विभाग के माध्यम से चीनी मिलों के संचालन का यह फैसला राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
