रिपोर्ट : कमल भारद्वाज
साल 2026 की शुरुआत बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के साथ हुई है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) ने पटना जिले के बिहटा अंचल में मेगा औद्योगिक पार्क के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। इस मामले में तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, अपर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी और बिहटा के तत्कालीन अंचलाधिकारी (CO) समेत कुल 10 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

जानकारी के मुताबिक, यह घोटाला बिहटा के सिकंदरपुर मौजा में सरकारी भूमि बैंक के लिए अधिग्रहित जमीन से जुड़ा है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को कुल 11 शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद निगरानी ब्यूरो ने जांच शुरू की। प्राथमिक जांच में ही करीब 55 लाख रुपये के मुआवजे के गबन और फर्जीवाड़े के सबूत सामने आए हैं। किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि में हेराफेरी कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
प्राथमिकी (कांड संख्या-01/2026) के अनुसार, इस घोटाले में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ निचले स्तर के कर्मचारी और एक बिचौलिया भी शामिल थे। कानूनगो, अमीन और राजस्व कर्मचारी की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और मुआवजे की रकम का गलत भुगतान कराया गया। सभी आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 और 468 (जालसाजी) तथा 120B (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह कार्रवाई केवल एक शिकायत के आधार पर की गई है, जबकि बाकी 10 शिकायतों की जांच अभी जारी है। ऐसे में घोटाले की राशि और बढ़ने की आशंका है। ब्यूरो ने दो टूक कहा है कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और मामले में आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
