मकर संक्रांति के मौके पर दही-चूड़ा भोज के जरिये राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव एक बार फिर सियासी सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार चर्चा की वजह सिर्फ भोज नहीं, बल्कि वह तरीका है जिससे तेज प्रताप ने राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। तेज प्रताप खुद एनडीए के नेताओं के घर जाकर उन्हें दही-चूड़ा भोज का न्योता दे रहे हैं, जिससे बिहार की राजनीति में नई अटकलें शुरू हो गई हैं।
जानकारी के मुताबिक तेज प्रताप यादव उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा और हम (सेक्युलर) के नेता व मंत्री संतोष सुमन के आवास पर पहुंचे और उन्हें व्यक्तिगत रूप से भोज में शामिल होने का निमंत्रण दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और मंत्री दीपक प्रकाश को भी आमंत्रित किया। तेज प्रताप की इस पहल को सामान्य शिष्टाचार से ज्यादा एक राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेज प्रताप का यह कदम एनडीए की ओर ‘सॉफ्ट सिग्नल’ देने की कोशिश हो सकता है। हालांकि, राजद की ओर से इसे पारंपरिक पर्व पर सामाजिक और राजनीतिक सौहार्द का प्रतीक बताया जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा भोज देना बिहार की पुरानी परंपरा है और तेज प्रताप उसी परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों के बीच भी इस निमंत्रण को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या तेज प्रताप यादव अपने अलग राजनीतिक कद को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं या इसके पीछे कोई बड़ा सियासी संदेश छिपा है। खासकर उस वक्त, जब बिहार की राजनीति में गठबंधन और समीकरण लगातार बदलते नजर आ रहे हैं।
फिलहाल तेज प्रताप यादव ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट राजनीतिक बयान नहीं दिया है। लेकिन एनडीए नेताओं के घर जाकर दिया गया उनका आमंत्रण यह जरूर दिखाता है कि दही-चूड़ा भोज के बहाने बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस कदम के मायने और साफ हो सकते हैं।

