बिहार सरकार ने आम नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए भूमि नापी की प्रक्रिया में ऐतिहासिक बदलाव किया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि नापी की नई व्यवस्था को लागू करने का आदेश जारी कर दिया है। यह व्यवस्था सरकार के सात निश्चय-3 (2025–30) कार्यक्रम के तहत Ease of Living के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिससे जमीन से जुड़े विवादों का निष्पादन सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से हो सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत अब भूमि नापी के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा। आवेदन के दौरान आवेदक को यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित भूमि अविवादित है या विवादित। यदि भूमि विवादित पाई जाती है, तो अंचलाधिकारी द्वारा विवाद की प्रकृति को परिभाषित किया जाएगा। इससे पहले भूमि नापी की प्रक्रिया में अस्पष्टता और देरी की शिकायतें आम थीं, जिन्हें इस नई प्रणाली से काफी हद तक दूर करने का प्रयास किया गया है।
अंचलाधिकारी द्वारा जिन मामलों को विवादित माना जाएगा, उनमें स्वामित्व से जुड़े प्रश्न, दंड प्रक्रिया संहिता या भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के अंतर्गत मामले, राजस्व न्यायालय में लंबित वाद, SHO-CO की संयुक्त बैठकों से जुड़े प्रकरण, चौहद्दीदारों व हिस्सेदारों के बीच विवाद, महिलाओं के वैधानिक हिस्से से जुड़े मामले, अवैध अतिक्रमण तथा नक्शा या मुश्तकिल से संबंधित विवाद शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल भूमि नापी की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि भ्रष्टाचार और मनमानी पर भी अंकुश लगेगा। साथ ही नागरिकों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार यह निर्णय भूमि सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जमीन से जुड़े विवादों का समाधान अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।

