पिता लालू प्रसाद के साथ प्रसन्न नजर आए तेज प्रताप यादव
तेज प्रताप ने दही-चूड़ा भोज में मां, तेजस्वी का इंतजार किया।

पिता लालू प्रसाद यादव पहुंचे, तेज प्रताप का चेहरा खिल उठा।
‘जयचंद’ का जिक्र कर तेज प्रताप ने दिए सियासी संकेत।
मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित दही-चूड़ा भोज ने तेज प्रताप यादव को एक बार फिर सुर्खियों में ला खड़ा किया।
जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष और राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव इस आयोजन के जरिए ‘पॉलिटिशियन ऑफ द डे’ बन गए। लेकिन इस भोज में राजनीति जितनी मुखर थी, उससे कहीं ज्यादा भावनाएं भी छलकती दिखीं।
“उन्हें जयचंदों ने घेर लिया होगा, हम रात नौ बजे तक इंतजार करेंगे।” तेज प्रताप के इन शब्दों में तंज भी थे और अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव के लिए एक भावुक संदेश भी।
भोज दोपहर बाद ही समाप्त हो गया, लेकिन तेज प्रताप की निगाहें देर रात तक दरवाजे की ओर टिकी रहीं। इंतजार था मां राबड़ी देवी का, भाई तेजस्वी यादव का और बड़ी बहन डॉ. मीसा भारती का। लेकिन यह इंतजार अधूरा ही रह गया। न मा आईना बड़ी बहन निशा भारती और नहीं छोटे भाई तेजस्वी यादव पहुंचे।
कार्यक्रम में सबसे पहले पहुंचे लालू प्रसाद यादव। पिता के आगमन पर तेज प्रताप का चेहरा खिल उठा। उन्होंने अंगवस्त्र भेंट कर पूरे आदर और भावुकता के साथ स्वागत किया।
परिवार के अन्य सदस्यों में मामा साधु यादव, प्रभुनाथ यादव और सुभाष यादव की मौजूदगी रही। लेकिन जिस परिवारिक एकजुटता की तस्वीर की उम्मीद थी, वह अधूरी ही दिखी।
मीडिया से बातचीत में तेज प्रताप ने एक बार फिर “जयचंद” का जिक्र कर सियासी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि पहले कृष्ण का अपमान किया गया, फिर जयचंद हावी हो गया।
“25 पर कैसे सिमट गए,” जैसे वाक्यों के जरिए उन्होंने बिना नाम लिए अपने ही परिवार और पार्टी की राजनीति पर सवाल खड़े किए।
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि यह राजद का आंतरिक मामला है और वह अब राजद में नहीं हैं। “हमारी रेखा अलग है,” कहकर उन्होंने अपने अलग राजनीतिक रास्ते को रेखांकित किया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तेज प्रताप ने इस मुलाकात को “ऐतिहासिक मिलन” बताया। उन्होंने लिखा कि लंबे समय बाद पिता से मिलना उनके लिए आशीर्वाद से कम नहीं है और यह मिलन उन्हें नई ऊर्जा देगा।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि यह दही-चूड़ा भोज सिर्फ एक पर्व का आयोजन नहीं था, बल्कि इसके जरिए तेज प्रताप ने भावनाओं और राजनीति, दोनों को एक साथ मंच पर लाकर आने वाले सियासी संकेत दे दिए हैं।
