बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल देखने को मिली है। जनता दल यूनाइटेड को उस समय राजनीतिक झटका लगा, जब पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव डॉ. चंदन यादव ने अपने समर्थकों के साथ राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) का दामन थाम लिया। यह घटनाक्रम शुक्रवार को हुए एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जहां रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने सभी को औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई।


इस अवसर पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि डॉ. चंदन यादव जैसे अनुभवी नेता के साथ आने से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि मगध क्षेत्र के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों में भी पार्टी का आधार मजबूत होगा। कुशवाहा ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में रालोमो बिहार की राजनीति में अपनी भूमिका और प्रभाव बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
रालोमो के प्रवक्ता रामपुकार सिन्हा के अनुसार, डॉ. चंदन यादव के साथ कई अन्य लोग भी पार्टी में शामिल हुए हैं। इनमें पूर्व आप्त सचिव नितिश कुमार, सेवानिवृत्त अभियंता ई. सत्येन्द्र यादव, विमल कुमार, चन्द्रशेखर कुमार, अनूप चंद्रवंशी, विवेक कुमार पाण्डेय, मो. आरिफ खां और चंदन शेखर जैसे नाम शामिल हैं। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इन नेताओं के जुड़ने से संगठनात्मक ढांचे को मजबूती मिलेगी।
दूसरी ओर, जदयू के भीतर भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। जदयू विधायक भगवान सिंह कुशवाहा के बयान ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि यदि रालोमो के विधायक जदयू में आना चाहें तो पार्टी के दरवाजे खुले हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, रालोमो के विधायक माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह ने अभी तक अपने अगले कदम को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। हाल के दिनों में इन नेताओं का भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ दिखना, नए राजनीतिक समीकरणों की अटकलों को और हवा दे रहा है।
