NEET की तैयारी कर रही छात्रा की कथित रेप के बाद मौत के मामले में जांच एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। विशेष जांच टीम (SIT) अब तक एम्स (AIIMS) के मेडिकल बोर्ड को पूरे और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाई है। इसे लेकर एम्स के डॉक्टरों ने साफ कहा है कि अधूरी मेडिकल चेन के आधार पर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना न तो वैज्ञानिक है और न ही नैतिक।
एम्स के फोरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की समीक्षा केवल एक-दो कागज देखकर संभव नहीं है। इसके लिए इलाज से जुड़े सभी रिकॉर्ड, पोस्टमॉर्टम वीडियो, फोरेंसिक रिपोर्ट, रेडियोलॉजिकल जांच और केस हिस्ट्री का पूरा दस्तावेजी सिलसिला जरूरी होता है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर कागज अधूरे रहे, तो रिव्यू रिपोर्ट भ्रामक हो सकती है और जांच गलत दिशा में जा सकती है।
हालांकि SIT ने अब तक की पूछताछ के आधार पर एक प्रारंभिक रिपोर्ट डीजीपी को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में करीब 15 से 17 लोगों से की गई पूछताछ का जिक्र है, जिनमें अस्पताल कर्मी, हॉस्टल स्टाफ और छात्रा के परिजन शामिल हैं। बावजूद इसके, मेडिकल रिव्यू के लिए आवश्यक दस्तावेज अब भी AIIMS को पूरे नहीं मिले हैं।
एम्स के डॉक्टरों ने दो टूक कहा है कि जल्दबाजी इस तरह के संवेदनशील मामलों में बेहद खतरनाक हो सकती है। बिना पूरे मेडिकल सबूतों के राय देना न सिर्फ जांच को प्रभावित करेगा, बल्कि न्याय की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करेगा।
इस बीच, पीएमसीएच की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने मामले की दिशा ही बदल दी। रिपोर्ट में कहा गया कि यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। शरीर पर चोटों और जबरन संबंध के संकेत मिलने की बात सामने आई, जिससे पुलिस की शुरुआती ‘सुसाइड एंगल’ वाली थ्योरी कमजोर पड़ गई और एफआईआर दर्ज करनी पड़ी।
अब पूरी जांच AIIMS की रिव्यू रिपोर्ट पर टिक गई है। इसी रिपोर्ट से तय होगा कि पोस्टमॉर्टम में उठे सवाल कितने ठोस हैं और आगे जांच किस दिशा में बढ़ेगी। AIIMS ने इसके लिए पांच वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम गठित की है, जिसमें फोरेंसिक, गायनाकोलॉजी, न्यूरोलॉजी, रेडियोलॉजी और मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ शामिल हैं।
उधर, छात्रा के परिजनों ने SIT पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि असली आरोपियों की बजाय परिवार से बार-बार एक जैसे सवाल पूछे जा रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि जब जांच की नींव मेडिकल रिपोर्ट है, तो मेडिकल बोर्ड को पूरे दस्तावेज अब तक क्यों नहीं सौंपे गए। अधूरे कागजों के साथ आगे बढ़ती जांच सच और न्याय—दोनों के लिए खतरा बनती दिख रही है।

