बिहार में सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता सुधारने की दिशा में शिक्षा विभाग ने एक अहम पहल शुरू की है। इसके तहत अब शिक्षकों को पढ़ाने से एक दिन पहले संबंधित विषय की पूरी तैयारी करनी होगी और पढ़ाए गए पाठ का प्रतिदिन संक्षिप्त विवरण डायरी में दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था को “पाठ-टिका” नाम दिया गया है, जिसे सभी शिक्षकों के लिए लागू किया गया है।

जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि अक्सर यह देखने में आता है कि कुछ शिक्षक बिना पूरी तैयारी के कक्षा में चले जाते हैं। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की समझ पर पड़ता है, खासकर गणित और विज्ञान जैसे विषयों में बच्चों के सवालों का संतोषजनक उत्तर नहीं मिल पाता। इसी कमी को दूर करने के लिए पाठ-टिका व्यवस्था लागू की गई है।
पाठ-टिका के तहत शिक्षक यह स्पष्ट रूप से लिखेंगे कि वे किस तिथि को कक्षा में कौन-सा पाठ पढ़ाने वाले हैं। इसके अलावा, दैनिक कार्य योजना के अंतर्गत पढ़ाए गए विषय का संक्षिप्त विवरण भी डायरी में नोट किया जाएगा। इससे न केवल शिक्षकों को अपनी पढ़ाई की योजना याद रहेगी, बल्कि निरीक्षण के दौरान यह भी स्पष्ट होगा कि किस दिन क्या पढ़ाया गया।
इसके साथ ही विभाग ने शिक्षकों की उपस्थिति और मध्याह्न भोजन योजना पर भी विशेष सख्ती के निर्देश दिए हैं। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने कहा है कि बच्चों को भोजन परोसने से पहले प्रधानाध्यापक या उनकी अनुपस्थिति में संबंधित शिक्षक भोजन को स्वयं चखेंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भोजन की गुणवत्ता अच्छी हो और बच्चों के स्वास्थ्य को कोई नुकसान न पहुंचे।
भोजन बनने वाली जगह की साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है। रसोई की दीवारों और फर्श की नियमित सफाई अनिवार्य होगी। प्रधानाध्यापक को निर्देश दिया गया है कि वे इन सभी व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखें। साथ ही ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर स्कूल में नामांकित कुल बच्चों और भोजन करने वाले बच्चों की सही संख्या दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।
शिक्षकों की उपस्थिति अब ऑनलाइन फोटो के साथ दर्ज की जाएगी। जिला स्तर पर नियमित और रैंडम जांच की जा रही है, जिसमें अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई होगी। बिना स्वीकृत अवकाश के विद्यालय से अनुपस्थित रहने पर भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
अवकाश स्वीकृति को लेकर यह भी स्पष्ट किया गया है कि एक समय में कुल शिक्षकों के दस प्रतिशत से अधिक को अवकाश नहीं दिया जाएगा, ताकि पठन-पाठन बाधित न हो। शिक्षा विभाग का मानना है कि इन सख्त और व्यवस्थित कदमों से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा और छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा।
