
बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। योजना के अंतर्गत सफल जीविका लाभार्थियों की पहचान (स्क्रूटनी) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का लक्ष्य है कि चिन्हित महिलाओं को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में दो-दो लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया जाए, जिससे वे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें और आत्मनिर्भर बनें।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में उन जीविका दीदियों को चुना जाएगा, जिन्होंने पहले से मिले 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि का सही उपयोग कर स्वरोजगार की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब तक राज्य में डेढ़ करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार के लिए यह प्रारंभिक सहायता दी जा चुकी है। इनमें से सफल महिलाओं को अगले स्तर पर पहुंचाने के लिए यह विशेष अनुदान दिया जाएगा।
योजना के तहत 15 फरवरी से पहले पहले चरण का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है। यह प्रशिक्षण जिलेवार आयोजित किया जाएगा और जीविका समूहों के माध्यम से महिलाओं को जोड़ा जाएगा। छह दिवसीय इस प्रशिक्षण में महिलाओं को सफल व्यवसाय के मॉडल दिखाए जाएंगे, ताकि वे व्यावहारिक रूप से समझ सकें कि किस तरह छोटे व्यवसाय को बड़े स्तर पर ले जाया जा सकता है। इसके साथ ही वित्तीय लेखा-जोखा, आय-व्यय का प्रबंधन, बाजार से जुड़ाव और उद्यमिता के मूलभूत गुर भी सिखाए जाएंगे।
सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तय कर दी है। इसके अनुसार जीविका दीदियों के व्यवसाय का आकलन किया जाएगा और चरणवार दो-दो लाख रुपये की राशि उनके खातों में ट्रांसफर की जाएगी। यह राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार की अनियमितता न हो।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही सोशल मीडिया के माध्यम से इस योजना की घोषणा कर चुके हैं। उनका कहना है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के जरिए न केवल महिलाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर, यह योजना बिहार की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता, सम्मान और स्थायी आजीविका की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जिससे हजारों जीविका दीदियों का भविष्य संवरने की उम्मीद है।
