नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब पटना हाईकोर्ट पहुंच गया है। छात्रा के पिता ने न्याय की गुहार लगाते हुए उच्च न्यायालय में आपराधिक रिट याचिका दायर की है। याचिका पर त्वरित सुनवाई की मांग न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा की एकलपीठ के समक्ष की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। अदालत ने मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है और संभावना जताई जा रही है कि इस पर सोमवार को सुनवाई हो सकती है।

जहानाबाद जिले की रहने वाली छात्रा पटना में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद परिजन लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। पिता की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि अब तक की पुलिस जांच से वे संतुष्ट नहीं हैं और मामले में कई गंभीर सवाल अनुत्तरित हैं। याचिका में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थानों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
याचिका में राज्य के गृह विभाग के प्रधान सचिव, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), पटना के एसपी और चित्रगुप्त नगर थाने की प्रभारी रोशनी कुमारी को प्रतिवादी बनाया गया है। इसके अलावा शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक श्रवण अग्रवाल, नीलम अग्रवाल, आंसू अग्रवाल, हॉस्टल की वार्डन चंचला, मकान मालिक मनीष रंजन को भी पक्षकार बनाया गया है।
इतना ही नहीं, छात्रा के इलाज से जुड़े डॉ. प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल और उसके चिकित्सक डॉ. सतीश, जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल तथा सहज सर्जरी को भी याचिका में प्रतिवादी के रूप में नामित किया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि छात्रा के इलाज और पूरे घटनाक्रम में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
वहीं दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया है। सरकार के इस फैसले के बाद भी छात्रा का परिवार संतुष्ट नहीं है। परिजनों का कहना है कि अब तक की जांच प्रक्रिया पर उन्हें भरोसा नहीं रहा है और वे चाहते हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अब सबकी नजरें अदालत की आगामी सुनवाई और इस प्रकरण में आने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं।
