
Desk ASR
पटना से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने खाकी की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। राजधानी के गांधी मैदान थाना में तैनात रहे एक एएसआई समेत तीन पुलिसकर्मियों को निगरानी कोर्ट ने भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का दोषी मानते हुए तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। मामला कोई नया नहीं, बल्कि पूरे 8 साल पुराना है, लेकिन इंसाफ ने देर से ही सही, दस्तक जरूर दी है।
यह मामला एक साधारण फल विक्रेता सुधीर कुमार से जुड़ा है, जिसकी गलती सिर्फ इतनी थी कि वह सड़क किनारे फल बेचकर अपने परिवार का पेट पाल रहा था। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने सुधीर कुमार के साथ न सिर्फ बेरहमी से मारपीट की, बल्कि जबरन उससे पैसे भी छीन लिए। पीड़ित ने डर के बावजूद हार नहीं मानी और न्याय की लड़ाई लड़ी। निगरानी जांच में आरोप सही पाए गए। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून के रक्षक अगर खुद कानून तोड़ेंगे, तो समाज में भरोसा कैसे बचेगा। अदालत का यह फैसला उन तमाम लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो वर्दी के डर से चुप रह जाते हैं।
इस फैसले ने एक बड़ा संदेश दिया है—वर्दी किसी को अपराध करने का लाइसेंस नहीं देती। चाहे पुलिसकर्मी हों या अधिकारी, कानून सबके लिए बराबर है। 8 साल बाद मिला यह फैसला भले ही देर से आया हो, लेकिन यह साबित करता है कि सच और संघर्ष की जीत आखिरकार होती है।
