जंगल में प्रेम, तांत्रिक की वहशियत और न्याय की दस्तकRarest of Rare Crime 2025: फेविक्विक से चिपकाकर बनाई गई खौफनाक साजिश, उम्रकैद ने दिया सख्त संदेशराजस्थान के सुदूर जंगलों में घटित यह वारदात सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि इंसानियत को झकझोर देने वाली हैवानियत की मिसाल बन गई। साल 2025 की शुरुआत में सामने आए इस मामले ने पूरे प्रदेश को सन्न कर दिया था। जंगल में एकांत की तलाश में पहुंचे एक युवक-युवती की जिंदगी उस वक्त नर्क में बदल गई, जब उनकी मुलाकात तांत्रिक भालेश से हुई। खुद को सिद्ध पुरुष बताने वाला यह शख्स दरअसल शैतानी सोच का मालिक निकला।जांच में सामने आया कि तांत्रिक ने कपल को डर और अंधविश्वास के जाल में फंसाया। उसने कथित “अनिष्ट” और “दोष” का हवाला देकर पहले भरोसा जीता, फिर मौका पाते ही दोनों पर फेविक्विक जैसा तेज रासायनिक पदार्थ डाल दिया। पल भर में दोनों एक-दूसरे से चिपक गए। दर्द, घबराहट और अपमान के बीच तांत्रिक की क्रूरता यहीं नहीं रुकी—उसने इस हालत को “तांत्रिक प्रयोग” बताकर तमाशा बनाया।घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस ने हस्तक्षेप किया। अस्पताल में घंटों की मशक्कत के बाद डॉक्टरों ने दोनों को अलग किया, लेकिन मानसिक और शारीरिक घाव लंबे समय तक साथ रहे। पुलिस जांच में यह भी उजागर हुआ कि आरोपी पहले भी अंधविश्वास के नाम पर लोगों को डराता-धमकाता रहा था।मामला अदालत पहुंचा तो इसे Rarest of Rare Crime की श्रेणी में रखा गया। अप्रैल 2025 में कोर्ट ने तांत्रिक भालेश को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। फैसले में न्यायालय ने साफ कहा कि अंधविश्वास की आड़ में की गई यह हैवानियत समाज के लिए गंभीर खतरा है और ऐसे अपराधों पर कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।यह फैसला न सिर्फ पीड़ितों के लिए न्याय की जीत है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक कड़ा संदेश भी—अंधविश्वास, धोखे और हिंसा के खिलाफ कानून पूरी ताकत से खड़ा है।

