ओडिशा वन विभाग का अजबोगरीब कारनामा 7 करोड़ की थार में लगाए गए 5 करोड़ के पार्ट्स, खुलासे से मचा प्रशासनिक हड़कंपओडिशा वन विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी खरीद और खर्च की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग द्वारा जंगल और दुर्गम इलाकों में गश्त के लिए खरीदी गई एक स्पेशल मॉडिफाइड थार अब विवादों के केंद्र में है। आरोप है कि करीब 7 करोड़ रुपये की इस हाई-एंड थार में 5 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत के लग्जरी और हाई-परफॉर्मेंस पार्ट्स लगाए गए, जिनकी जरूरत पर सवाल उठ रहे हैं।सूत्रों के मुताबिक, इस वाहन को वन्यजीव सुरक्षा और कठिन इलाकों में निगरानी के नाम पर खरीदा गया था। लेकिन जब इसके बिल और तकनीकी विवरण सामने आए तो अफसरशाही में खलबली मच गई। थार में विदेशी सस्पेंशन सिस्टम, बुलेटप्रूफ बॉडी पैनल, सैटेलाइट कम्युनिकेशन यूनिट, अत्याधुनिक कैमरे, नाइट विजन सिस्टम और इंटीरियर में लग्जरी कारों जैसे फीचर्स जोड़े गए थे। यही नहीं, इंजन और ट्रांसमिशन में भी महंगे अपग्रेड किए गए, जिनका कुल खर्च चौंकाने वाला बताया जा रहा है।मामले का खुलासा तब हुआ जब ऑडिट के दौरान वाहन से जुड़े बिलों और भुगतान विवरणों की जांच की गई। खर्च और उपयोगिता के बीच भारी अंतर देख वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल रिपोर्ट तलब की। इसके बाद विभागीय स्तर पर जांच बैठा दी गई है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि वाहन के मॉडिफिकेशन से जुड़े कई भुगतान अलग-अलग मदों में दिखाए गए, जिससे कुल खर्च पहली नजर में कम प्रतीत हो।इस पूरे प्रकरण के उजागर होते ही राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं विभाग का कहना है कि वाहन को विशेष परिस्थितियों और सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार कराया गया था, हालांकि खर्च को लेकर उठे सवालों पर संतोषजनक जवाब अभी बाकी है।फिलहाल, यह मामला राज्य में सरकारी खरीद, जवाबदेही और टैक्स के पैसों के इस्तेमाल को लेकर एक नई बहस छेड़ चुका है। जांच के नतीजों पर अब सबकी नजर टिकी है।

