
बिहार में प्रशासनिक हलकों में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब बिहार राजस्व सेवा संघ ने डिप्टी मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र लिखा। संघ का आरोप है कि राजस्व विभाग की जनसमस्याओं की सुनवाई के नाम पर “तमाशा” किया जा रहा है और अधिकारियों को खुलेआम धमकाने जैसी भाषा का इस्तेमाल हो रहा है। संघ ने साफ शब्दों में कहा है कि डिप्टी सीएम की “खड़े-खड़े सस्पेंड कर देंगे” जैसी भाषा अब स्वीकार्य नहीं है और इससे प्रशासनिक गरिमा को ठेस पहुंचती है।
संघ के पत्र में कहा गया है कि राजस्व सेवा के अधिकारी फील्ड में पहले से ही भारी दबाव और चुनौतियों के बीच काम कर रहे हैं। ऐसे में यदि जनप्रतिनिधि या सरकार के शीर्ष पदों पर बैठे लोग सार्वजनिक मंचों से अपमानजनक या डराने वाली भाषा का प्रयोग करेंगे, तो इससे अधिकारियों का मनोबल टूटेगा और कार्य संस्कृति प्रभावित होगी। संघ ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर अधिकारियों को सम्मान और सुरक्षा देने की मांग की है।
इधर, राजस्व सेवा संघ के सीएम को लिखें पत्र पर डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने भी तल्ख तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि संघ के किसी भी तरह के दबाव या धमकी को बर्दाश्त नहीं करेगा। विजय सिन्हा ने स्पष्ट किया कि वे खुद कानून और नियमों के तहत काम करते हैं, न कि डर के माहौल में। उन्होंने यह भी कहा कि संवाद और सम्मान से ही प्रशासन बेहतर ढंग से काम कर सकता है, न कि धमकियों से।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पत्र केवल एक प्रशासनिक शिकायत नहीं, बल्कि सरकार और नौकरशाही के बीच बढ़ते तनाव का संकेत है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पत्र पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या डिप्टी सीएम को लेकर कोई स्पष्ट संदेश सरकार की ओर से दिया जाता है।
