बिहार में फर्जीवाड़े के खिलाफ शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की बड़ी मुहिम लगातार तेज होती जा रही है। पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की गहन जांच की जा रही है। इस अभियान के तहत अब तक 6 लाख 46 हजार 796 शिक्षकों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच पूरी कर ली गई है।
जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अब तक 2,912 शिक्षकों के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। इन मामलों में कड़ी कार्रवाई करते हुए निगरानी विभाग द्वारा कुल 1,707 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। कई एफआईआर में एक से अधिक शिक्षकों को अभियुक्त बनाया गया है, जिससे फर्जीवाड़े के नेटवर्क की व्यापकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि जांच प्रक्रिया की हर महीने समीक्षा की जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर ढिलाई न हो। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में निगरानी की कार्रवाई में खास तेजी आई है। इस साल अब तक अलग-अलग जिलों में 126 नई एफआईआर दर्ज की गई हैं।
आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2025 में सबसे अधिक 21 मामले दर्ज हुए, जबकि जनवरी में 16 और नवंबर में 15 एफआईआर दर्ज की गईं। निगरानी विभाग के अनुसार 30 नवंबर 2025 तक दर्ज एफआईआर में कुल 2,912 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है।
सरकार और निगरानी विभाग का साफ कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में फर्जीवाड़ा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच का दायरा आगे भी बढ़ेगा और दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

