
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा इन दिनों मीडिया को लेकर खासे नाराज़ नजर आ रहे हैं। लगातार दूसरे दिन उन्होंने मीडिया के एक वर्ग पर तीखा हमला बोलते हुए उसे आत्ममंथन की नसीहत दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए एक पोस्ट में कुशवाहा ने बिना नाम लिए कुछ मीडिया संस्थानों पर तथ्यहीन, बेबुनियाद और बनावटी खबरें चलाने का आरोप लगाया।
उपेंद्र कुशवाहा ने अपने पोस्ट की शुरुआत “मीडिया के बंधुओं” कहकर की, लेकिन आगे शब्दों में तल्खी साफ झलकी। उन्होंने लिखा कि आजकल मीडिया उन पर “कुछ ज्यादा ही मेहरबानी” दिखा रहा है, लेकिन अगर उनकी नहीं तो कम से कम अपनी प्रतिष्ठा का ख्याल जरूर रखा जाए। कुशवाहा ने साफ कहा कि ऐसी फर्जी और मनगढ़ंत खबरों से किसी का कुछ बिगड़ता नहीं है, क्योंकि इन खबरों की उम्र महज 5 से 10 दिनों की होती है।
यह पहला मौका नहीं है जब उपेंद्र कुशवाहा ने मीडिया पर सवाल उठाए हों। इससे एक दिन पहले भी उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए कुछ खबरों को लेकर आपत्ति जताई थी। इतना ही नहीं, हाल ही में सासाराम दौरे के दौरान भी वह मीडिया से नाराज नजर आए थे। उस दौरान उन्होंने पत्रकारों से सवालों के अंदाज पर चुटकी लेते हुए कहा था, “आप लोगों के पास कोई सवाल नहीं है क्या?”—यह बयान भी काफी चर्चा में रहा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उपेंद्र कुशवाहा का यह रुख केवल व्यक्तिगत नाराजगी नहीं, बल्कि राजनीति और मीडिया के रिश्तों में बढ़ती तल्खी का संकेत भी है। खासकर चुनावी माहौल में जब नेताओं की हर गतिविधि सुर्खियों में रहती है, तब खबरों की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, कुशवाहा ने किसी खास मीडिया हाउस या पत्रकार का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा स्पष्ट था। उनका कहना यही है कि आलोचना हो, सवाल हों—लेकिन तथ्यों के साथ। वरना ऐसी खबरें आती हैं और चली जाती हैं, लेकिन मीडिया की साख पर सवाल जरूर खड़े कर जाती हैं।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या मीडिया इस आलोचना को गंभीरता से लेकर आत्ममंथन करेगा, या यह विवाद भी कुछ दिनों में सुर्खियों से गायब हो जाएगा?
