उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू द्वारा बिहार की महिलाओं को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान ने देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बवाल खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के सामने आने के बाद बिहार में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। महिलाओं, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस बयान को बिहार की महिलाओं के सम्मान पर सीधा हमला बताया है।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा और जदयू पर जोरदार निशाना साधा है। राजद नेताओं ने कहा कि यह बयान भाजपा-जदयू की कथित महिला विरोधी सोच को उजागर करता है। पार्टी ने इसे बिहार की महिलाओं के स्वाभिमान पर “तमाचा” करार देते हुए प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री से इस मामले पर स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग की है। राजद का कहना है कि यदि दोषी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह चुप्पी महिलाओं के अपमान को मौन समर्थन मानी जाएगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार राज्य महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने बयान को निंदनीय बताते हुए संबंधित तथ्यों की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि महिलाओं की गरिमा से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग की ओर से आगे कानूनी कार्रवाई की भी संभावना जताई गई है।
वहीं, इस पूरे विवाद पर अब तक न तो गिरधारी लाल साहू की ओर से सार्वजनिक माफी आई है और न ही उत्तराखंड सरकार या भाजपा की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। इस चुप्पी को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है और इसे राजनीतिक दोहरे मापदंड से जोड़कर देख रहा है।
फिलहाल, यह मुद्दा केवल एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान, राजनीतिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा को लेकर एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में इस मामले पर सियासत और तेज होने की संभावना है।
