बिहार सरकार ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से शिक्षकों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का मकसद कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाना, विद्यालयी वातावरण को अनुशासित रखना और छात्रों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब शिक्षकों को पाठ्यक्रम और पाठ-टीका (टीचर गाइड) के आधार पर ही शिक्षण कार्य करना होगा, ताकि पढ़ाई में एकरूपता बनी रहे और छात्रों को निर्धारित शैक्षणिक लक्ष्य समय पर प्राप्त हो सकें।

नए नियमों के तहत विद्यालय में जींस और टी-शर्ट पहनने पर प्रतिबंध लगाया गया है। शिक्षकों को गरिमामय और मर्यादित वेशभूषा में विद्यालय आना अनिवार्य होगा। वहीं, मध्याह्न भोजन योजना को लेकर भी सख्ती बढ़ाई गई है। अब भोजन छात्रों को परोसने से पहले शिक्षकों या नामित कर्मियों को उसका स्वाद चखना होगा, जिससे भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
फर्जी उपस्थिति पर रोक लगाने के लिए सरकार ने प्रधानाध्यापकों की जवाबदेही तय की है। यदि विद्यालय में गलत या फर्जी उपस्थिति पाई जाती है तो इसके लिए सीधे प्रधानाध्यापक जिम्मेदार माने जाएंगे। इसके अलावा, अवकाश से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा और बिना अनुमति अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई की जा सकेगी।
डिजिटल निगरानी को बढ़ावा देते हुए ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, विद्यालय अवधि के दौरान शिक्षकों के बैंक जाने या जिला कार्यालयों में व्यक्तिगत कार्यों के लिए जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
सरकार का मानना है कि इन दिशा-निर्देशों से विद्यालयों में अनुशासन मजबूत होगा, शिक्षण व्यवस्था पारदर्शी बनेगी और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा।
