राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। वर्ष 2025 में आठ भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की करीब 4.14 करोड़ रुपये की अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को राज्यसात करने का प्रस्ताव सक्षम प्राधिकार को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही जब्ती की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

निगरानी ब्यूरो के अनुसार, जिन लोगों के खिलाफ यह प्रस्ताव भेजा गया है, उनमें दो तत्कालीन मुखिया, एक अधीक्षण अभियंता, एक न्यायिक दंडाधिकारी, एक फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, एक अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), एक टैक्स दारोगा और एक सीडीपीओ शामिल हैं। इन सभी के विरुद्ध वर्ष 2012 से 2019 के बीच भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए गए थे।
किन पर कितनी संपत्ति जब्त होगी
दिलीप कुमार, तत्कालीन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, लखीसराय — 88.25 लाख रुपये
विजय प्रताप सिंह, तत्कालीन SDO, हथुआ (गोपालगंज) — 62.35 लाख रुपये
ओमप्रकाश मांझी, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण कार्य विभाग — 90.75 लाख रुपये
मैनेजर यादव, तत्कालीन मुखिया, लौरिया (पश्चिम चंपारण) — 80.04 लाख रुपये
राकेश कुमार राय, तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी, दरभंगा — 41.12 लाख रुपये
अजय कुमार गुप्ता, तत्कालीन टैक्स दारोगा, मोतिहारी — 34.62 लाख रुपये
फूलपरी देवी, तत्कालीन सीडीपीओ, पटना ग्रामीण — 12.76 लाख रुपये
प्रमोद कुमार राय, तत्कालीन मुखिया, जितवारिया (समस्तीपुर) — 3.71 लाख रुपये
कुल प्रस्तावित जब्ती: 4.14 करोड़ रुपये
अब तक की स्थिति
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो अब तक 119 मामलों में 96.76 करोड़ रुपये की संपत्तियों को राज्यसात करने का प्रस्ताव दे चुका है। इनमें से 66 मामले (57 करोड़ रुपये) सक्षम प्राधिकार की अदालत में लंबित हैं, जबकि 32 मामले (20.80 करोड़ रुपये) उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। दो मामले सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी के रूप में दर्ज हैं। अब तक 11 मामलों में 6.03 करोड़ रुपये की संपत्तियां अंतिम रूप से राज्यसात हो चुकी हैं।
क्या बोले डीजी
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि भ्रष्टाचारियों की अवैध संपत्तियों को राज्यसात करने की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। वर्ष 2025 में भेजे गए आठ प्रस्तावों पर शीघ्र निर्णय की उम्मीद है।
