बिहार में प्रशासन को और अधिक जनोन्मुखी बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर 19 जनवरी से राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को आम लोगों की शिकायतें सुनी जाएंगी। यह व्यवस्था पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक लागू होगी, जिससे लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि निर्धारित दिनों में सभी अधिकारी अपने-अपने कार्यालयों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे और जनता की शिकायतों को गंभीरता से सुनेंगे। शिकायतों का न केवल पंजीकरण किया जाएगा, बल्कि उनके त्वरित निष्पादन के लिए संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई भी सुनिश्चित करनी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन का दायित्व केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि आम जनता की समस्याओं का समाधान करना भी है।
इस व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत और प्रखंड स्तर पर अधिकारी ग्रामीणों की समस्याएं सुनेंगे, वहीं शहरी और जिला स्तर पर जिलाधिकारी, अनुमंडल पदाधिकारी सहित अन्य विभागीय अधिकारी लोगों की शिकायतों पर सीधे सुनवाई करेंगे। खासतौर पर भूमि विवाद, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आवास, राशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और राजस्व से जुड़ी समस्याओं पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रशासन और जनता के बीच संवाद मजबूत होगा और शिकायतों के समाधान में पारदर्शिता आएगी। साथ ही, यह व्यवस्था भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाने में सहायक साबित होगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जनता दरबार की यह नियमित व्यवस्था राज्य में सुशासन को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आम लोगों को अपने अधिकारों के लिए सीधा मंच मिलेगा।

