बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति का दही-चूड़ा भोज हमेशा खास महत्व रखता रहा है, लेकिन इस बार एक बड़ी परंपरा टूटने जा रही है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के आवास पर आयोजित होने वाला पारंपरिक दही-चूड़ा भोज इस वर्ष नहीं होगा। इस बात की आधिकारिक पुष्टि राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने की है।

मंगनी लाल मंडल ने राबड़ी देवी के सरकारी आवास पर लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से मुलाकात के बाद बताया कि इस बार मकर संक्रांति के अवसर पर लालू-राबड़ी आवास पर किसी भी तरह का भोज आयोजित नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि हर साल यह आयोजन बिहार की राजनीति में शक्ति प्रदर्शन, आपसी मेल-जोल और राजनीतिक संदेश देने का बड़ा मंच माना जाता रहा है।
अतीत में इस भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दिग्गज नेता शिरकत कर चुके हैं। कई बार इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा गया है। ऐसे में आयोजन रद्द होने की खबर ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया है।
हालांकि, दही-चूड़ा की सियासत इस बार भी पूरी तरह थमती नजर नहीं आ रही है। लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के प्रमुख तेजप्रताप यादव 14 जनवरी को पटना में भव्य दही-चूड़ा भोज का आयोजन कर रहे हैं। इस आयोजन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
तेजप्रताप यादव ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, मंत्रियों और विभिन्न दलों के नेताओं को स्वयं आमंत्रण दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह आयोजन केवल सामाजिक नहीं, बल्कि सियासी शक्ति प्रदर्शन का भी अहम मंच साबित हो सकता है।
ऐसे में मकर संक्रांति के दिन सबकी निगाहें तेजप्रताप यादव के भोज पर टिकी रहेंगी, जो बिहार की राजनीति में नए संकेत दे सकता है।
