बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) द्वारा आयोजित पुलिस अवर निरीक्षक (SI) पद की प्रारंभिक लिखित प्रतियोगिता परीक्षा रविवार, 18 जनवरी 2026 को पूरे राज्य में पूरी तरह शांतिपूर्ण, पारदर्शी और कदाचारमुक्त माहौल में संपन्न हुई। परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था इस बार एक मिसाल के रूप में सामने आई है।
आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या-05/2025 के तहत कुल 1799 रिक्तियों के लिए यह बहुप्रतीक्षित परीक्षा आयोजित की जा रही है। अभ्यर्थियों की संख्या 10 लाख से अधिक होने के कारण परीक्षा को दो तिथियों—18 जनवरी और 21 जनवरी 2026—को दो-दो पालियों में कराने का निर्णय लिया गया। इसी क्रम में पहले चरण की परीक्षा रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
राज्य के सभी 38 जिलों में कुल 498 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा प्रथम पाली में सुबह 10:00 से 12:00 बजे तक और द्वितीय पाली में दोपहर 2:30 से 4:30 बजे तक आयोजित की गई। बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों की मौजूदगी के बावजूद कहीं से भी अव्यवस्था या कदाचार की कोई सूचना नहीं मिली।
परीक्षा को पूरी तरह स्वच्छ और निष्पक्ष बनाने के लिए आयोग ने अत्याधुनिक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था लागू की थी। सभी परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए गए ताकि किसी भी तरह की इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी या नकल की संभावना समाप्त की जा सके। इसके साथ ही सीसीटीवी सर्विलांस, प्रत्येक केंद्र पर हॉटलाइन VoIP फोन, प्रवेश द्वार पर अभ्यर्थियों की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी, परीक्षा के दौरान बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट सत्यापन, तथा निरंतर फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग की गई।
इन सख्त व्यवस्थाओं का असर यह रहा कि परीक्षा के दौरान पूरी तरह अनुशासन बना रहा। आयोग के अनुसार, परीक्षा में लगभग 70 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई, जो इतनी बड़ी परीक्षा के लिहाज से संतोषजनक मानी जा रही है।
आयोग ने परीक्षा के सफल आयोजन का श्रेय केंद्राधीक्षकों, जिला प्रशासन, पुलिस बल और अनुशासित अभ्यर्थियों को दिया है। सभी के सहयोग से परीक्षा बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकी।
अब अभ्यर्थियों की निगाहें 21 जनवरी 2026 पर टिकी हैं, जब शेष अभ्यर्थियों के लिए पुनः दोनों पालियों में प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जाएगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि आगामी परीक्षा में भी इसी स्तर की सख्ती और पारदर्शिता बरकरार रखी जाएगी।
बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा आयोजित यह परीक्षा न केवल भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता को मजबूत करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि बड़े पैमाने पर होने वाली प्रतियोगी परीक्षाएं भी यदि सही योजना और कड़ी निगरानी के साथ कराई जाएं, तो पूरी तरह कदाचारमुक्त और शांतिपूर्ण हो सकती हैं।

