पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की छात्रा से जुड़े गंभीर मामले ने पूरे बिहार की राजनीति को गरमा दिया है। इस संवेदनशील प्रकरण पर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। मीडिया से बातचीत के दौरान मांझी ने इस घटना को “मानवता को शर्मसार करने वाली” बताया और कहा कि ऐसे अपराध सभ्य समाज के लिए कलंक हैं।

मांझी ने कहा कि सरकार इस मामले को लेकर पूरी तरह गंभीर और संवेदनशील है। पीड़िता को न्याय दिलाने में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर जांच के दौरान कहीं कोई बाधा आती है, तो वे स्वयं भारत सरकार के गृह मंत्रालय से बात करेंगे। उनका कहना था कि न्याय की प्रक्रिया में कोई समझौता नहीं होगा।
जांच की स्थिति को लेकर मांझी ने बातचीत में दो बार यह बात दोहराई कि इस मामले को CBI ने टेक अप कर लिया है। हालांकि राज्य स्तर पर पहले ही SIT का गठन किया जा चुका है, लेकिन मांझी के बयान के बाद इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि जांच किस एजेंसी के पास है। बावजूद इसके, उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि जांच एजेंसी चाहे जो भी हो, दोषियों को किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली या रसूखदार क्यों न हो, उसे पाताल से भी खोजकर बाहर निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार में कानून से ऊपर कोई नहीं है और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजना तय है।
अस्पताल प्रशासन और मेडिकल रिपोर्ट को लेकर उठ रहे सवालों पर भी मांझी ने कड़ा रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी डॉक्टर या अस्पताल कर्मी ने जानबूझकर रिपोर्ट में हेरफेर किया है या साक्ष्य छिपाने की कोशिश की है, तो उनके खिलाफ भी उतनी ही सख्त कार्रवाई होगी, जितनी मुख्य आरोपियों पर होगी। ऐसे लोगों को भी बराबर का दोषी माना जाएगा।
मांझी ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में जांच को प्रभावित करने की कोशिश करने वाले लोग समाज के लिए उतने ही खतरनाक हैं जितने सीधे अपराध करने वाले। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार पीड़िता और उसके परिवार के साथ खड़ी है और अंत तक न्याय दिलाने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।
