औरंगाबाद जिले के दाऊदनगर अनुमंडल अस्पताल में रिश्वतखोरी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने सरकारी दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार की हकीकत उजागर कर दी है। अस्पताल में तैनात लिपिक ब्रिजमोहन लाल को निगरानी विभाग की टीम ने 2000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एक GNM की शिकायत के आधार पर की गई, जिसने हिम्मत दिखाते हुए भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई।
मामला हाजिरी बनाने से जुड़ा है। परिवादी GNM छह दिनों के लिखित अवकाश पर थीं, जिसकी स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी थी और उन दिनों की सैलरी का भुगतान भी विभाग द्वारा हो चुका था। इसके बावजूद लिपिक ब्रिजमोहन लाल ने अवकाश के दिनों की भी हाजिरी बनाने के एवज में 2000 रुपये की रिश्वत की मांग की। मजबूर होकर GNM ने इसकी शिकायत निगरानी विभाग से की।
शिकायत सत्यापित होने के बाद निगरानी विभाग ने जाल बिछाया और जैसे ही लिपिक ने रिश्वत की राशि ली, उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। इस कार्रवाई से एक बार फिर यह साबित हो गया कि अगर पीड़ित सामने आएं तो भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
हालांकि यह मामला सिर्फ एक अस्पताल या एक लिपिक तक सीमित नहीं है। हकीकत यह है कि कई सरकारी विभागों में ऐसे लिपिक और कर्मचारी बैठे हैं, जो आम कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर अवैध वसूली करते हैं। कई जगह तो कथित “टॉर्चर गैंग” सक्रिय हैं, जिनकी पहुंच नेताओं और बड़े अधिकारियों तक बताई जाती है। ऐसे में दाऊदनगर की GNM की हिम्मत एक मिसाल है, जो यह दिखाती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना संभव है, बस साहस की जरूरत है।

