पटना में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रेलवे निर्माण परियोजना से जुड़े कथित रिश्वत कांड का खुलासा किया है। इस मामले में एक निजी कंपनी के चार वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य अभियंता समेत कुल 11 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है।

CBI से मिली जानकारी के अनुसार, रेलवे की एक प्रमुख निर्माण परियोजना में लंबे समय से घूसखोरी का संगठित नेटवर्क सक्रिय था। जांच के दौरान सामने आया कि निर्माण कार्यों के बिल पास कराने और भुगतान स्वीकृत कराने के बदले रेलवे अधिकारियों को मोटी रकम दी जा रही थी।
केंद्रीय एजेंसी ने निजी कंपनी एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग के प्रबंध निदेशक अनूप सिंह, सहायक महाप्रबंधक गौरव कुशवाहा, अकाउंटेंट आकाश पात्रा और धीरज विरमानी को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही पूर्व मध्य रेलवे के निर्माण विभाग से जुड़े मुख्य अभियंता अनिल कुमार सहित 11 अधिकारियों और कर्मियों को इस मामले में अभियुक्त बनाया गया है।
गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को गुरुवार देर शाम पटना व्यवहार न्यायालय में पेश किया गया। CBI के विशेष न्यायाधीश ने चारों गिरफ्तार अभियुक्तों को सात दिनों की रिमांड पर CBI को सौंप दिया है। इस दौरान एजेंसी उनसे गहन पूछताछ करेगी और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच करेगी।
CBI की टीम ने इस मामले में पटना के महेंद्रूघाट स्थित पूर्व मध्य रेलवे निर्माण कार्यालय, रोहतास जिले के डेहरी ऑन सोन सहित एक दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान करीब 45 लाख रुपये नकद बरामद किए जाने की बात सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, CBI की एक टीम बुधवार से ही महेंद्रूघाट स्थित रेलवे कार्यालय में मौजूद थी। छापेमारी के बाद मुख्य अभियंता समेत विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई। माना जा रहा है कि इस केस में निर्माण विभाग से जुड़े कुछ और अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
फिलहाल CBI पूरे मामले की परत-दर-परत जांच कर रही है। एजेंसी का दावा है कि आने वाले दिनों में इस रिश्वत कांड से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
