पटना जंक्शन गोलंबर पर नियमित वाहन जांच के दौरान एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। सार्जेंट रौशनी पटेल द्वारा की जा रही जांच में एक संदिग्ध वाहन को रोका गया, जिसकी गहन पड़ताल के बाद उसके चोरी का होने का खुलासा हुआ। प्रारंभिक तौर पर वाहन के कागजात और नंबर प्लेट सामान्य प्रतीत हो रहे थे, लेकिन संदेह के आधार पर जब वाहन के चेसिस नंबर की जांच की गई, तो मामला पूरी तरह स्पष्ट हो गया।


चेसिस नंबर के मिलान के दौरान यह सामने आया कि उक्त वाहन उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले का है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार यह वाहन वर्ष 2018 में गाजीपुर थाना क्षेत्र से चोरी हुआ था। वाहन चोरी के संबंध में गाजीपुर थाने में पहले से ही प्राथमिकी (FIR) दर्ज है। इसके बावजूद वाहन चोरों ने शातिर तरीके से वाहन पर फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) और फर्जी नंबर प्लेट लगाकर इसे बिहार में चलाया जा रहा था।
जांच के दौरान वाहन चालक से पूछताछ की गई, लेकिन वह वाहन से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद चेसिस नंबर के आधार पर जब ऑनलाइन और थाने के रिकॉर्ड से मिलान किया गया, तो वाहन के चोरी होने की पुष्टि हो गई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए वाहन को जब्त कर लिया।
सार्जेंट रौशनी पटेल द्वारा आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद चोरी का वाहन एवं वाहन चालक को कोतवाली थाना को सुपुर्द कर दिया गया। कोतवाली थाना पुलिस द्वारा आगे की जांच की जा रही है और वाहन चालक की भूमिका की भी गहन पड़ताल की जा रही है। यह भी जांच का विषय है कि वाहन चालक स्वयं चोरी में शामिल था या किसी बड़े गिरोह के माध्यम से यह वाहन बिहार तक पहुंचा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले में अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा है। फर्जी कागजात तैयार कर वर्षों तक वाहन का इस्तेमाल किया जाना संगठित अपराध की ओर इशारा करता है। फिलहाल मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है और गाजीपुर पुलिस से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
पटना पुलिस की इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है। नियमित जांच और सतर्कता के कारण एक पुराने चोरी के मामले का खुलासा हो सका है, जिससे अपराधियों में स्पष्ट संदेश गया है कि कानून की नजर से बच पाना आसान नहीं है।
