राज्य में अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए खान एवं भूतत्व विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने अवैध खनन के मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने वाले जिलों के खनन पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश जारी किया है। इसके साथ ही सभी जिलों में जिला टास्क फोर्स की बैठक हर सप्ताह नियमित रूप से आयोजित करने को कहा गया है।

मंगलवार को खान एवं भूतत्व विभाग के निदेशक मनेश कुमार मीणा की अध्यक्षता में अवैध खनन, अवैध परिवहन तथा कार्य विभागों से राजस्व वसूली को लेकर संचालित स्पेशल ड्राइव की राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से प्राप्त स्पेशल ड्राइव की रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा की गई।
समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई जिलों से स्पेशल ड्राइव से संबंधित रिपोर्ट या तो प्राप्त नहीं हुई है या फिर निर्धारित समयसीमा के भीतर उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस पर निदेशक ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित जिलों के खनन पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अवैध खनन और राजस्व क्षति के मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि जिला स्तर पर गठित टास्क फोर्स की बैठक प्रत्येक सप्ताह अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए। इन बैठकों में अवैध खनन, अवैध परिवहन, जब्ती, प्राथमिकी दर्ज करने तथा राजस्व वसूली की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। साथ ही बैठक की कार्यवाही और निर्णयों की रिपोर्ट समय पर विभाग को भेजना अनिवार्य होगा।
निदेशक मनेश कुमार मीणा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्पेशल ड्राइव के तहत की जा रही कार्रवाई को केवल औपचारिकता न बनाया जाए, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि अवैध खनन से न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरण और कानून-व्यवस्था पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
बैठक में यह भी कहा गया कि जिन जिलों में अवैध खनन और परिवहन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, वहां निगरानी और सघन जांच अभियान तेज किया जाए। संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और संयुक्त कार्रवाई पर भी जोर दिया गया।
खान एवं भूतत्व विभाग का मानना है कि इन सख्त निर्देशों के बाद जिलों में जवाबदेही तय होगी और अवैध खनन के खिलाफ चल रहे अभियान को मजबूती मिलेगी। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि तय समयसीमा में रिपोर्ट नहीं देने और कार्रवाई में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ आगे और कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।
