राजधानी पटना में गंगा जलमार्ग को नई मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पटना में अत्याधुनिक जहाज मरम्मत केंद्र (शिप रिपेयर फैसिलिटी) के निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 243.20 करोड़ रुपये है और इसके लिए 10 फरवरी को टेक्निकल बिड खोली जाएगी। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे 24 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।


परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि यह परियोजना बिहार में जल परिवहन की अपार संभावनाओं को साकार करने वाली है। पटना में गंगा नदी के दक्षिणी तट पर लगभग 20,000 वर्ग मीटर भूमि बिहार सरकार की ओर से उपलब्ध करा दी गई है, जहां इस अत्याधुनिक जहाज मरम्मत केंद्र का निर्माण होगा। यहां मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और भारी उपकरणों की रिपेयरिंग की सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
कोच्चि वाटर मेट्रो की तर्ज पर पटना में वाटर मेट्रो
परिवहन मंत्री ने बताया कि कोच्चि वाटर मेट्रो की तर्ज पर पटना में भी 1200 करोड़ रुपये की लागत से वाटर मेट्रो परियोजना की डीपीआर तैयार की जा रही है। इसमें जेटी निर्माण, टर्मिनल का विकास और जहाजों की खरीद शामिल है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पटना और आसपास के घाटों से नियमित फेरी सेवा के लिए 22 हाइब्रिड जहाज लाने का प्रस्ताव है, जो मात्र 1 मीटर गहराई वाले पानी में भी चल सकेंगे। इससे यात्रियों को सस्ती और सुविधाजनक परिवहन सेवा मिलेगी।
फिलहाल एक इलेक्ट्रिक हाइब्रिड वाटर मेट्रो का ट्रायल चल रहा है, जबकि एक और वाटर मेट्रो जल्द पटना पहुंचेगी। इनका परिचालन कंगन घाट, गायघाट, गांधी घाट, दीघा घाट, फरक्का महतो घाट, नारियल घाट, पानापुर, कोंहरा घाट, काली घाट (सोनपुर) और छेछर घाट के बीच प्रस्तावित है। यह परियोजना राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा) को और मजबूत करेगी।
कोलकाता पर निर्भरता होगी खत्म
वर्तमान में राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर कोलकाता में ही जहाज मरम्मत की सुविधा उपलब्ध है, जिसके कारण जहाजों को मरम्मत के लिए वहां भेजना पड़ता है। इससे समय और लागत दोनों की भारी बर्बादी होती है। पटना में जहाज मरम्मत केंद्र बनने से यह निर्भरता समाप्त होगी और जलमार्ग परिवहन अधिक किफायती व सुगम बनेगा।
बॉक्स | केंद्र में होंगी ये प्रमुख सुविधाएं
पोत उत्थापन अवसंरचना: स्लिपवे, साइड स्लिपवे, कंक्रीट प्लेटफॉर्म, जहाज लिफ्ट व स्थानांतरण प्रणाली
क्षमता: 800 टन क्षमता वाला मरीन बोट होइस्ट, हाइड्रोलिक ट्रेलर
मरम्मत कक्ष: प्राथमिक मरम्मत कक्ष, छोटे पोत कक्ष, अतिरिक्त राफ्ट फाउंडेशन स्लैब
अन्य सुविधाएं: विद्युत सबस्टेशन, गैन्ट्री क्रेन, जिब क्रेन, मोबाइल व डॉकसाइड क्रेन, जल आपूर्ति-निकासी प्रणाली
आईवी एक्ट 2021 के तहत जांच अनिवार्य
अंतर्देशीय पोत अधिनियम-2021 के तहत हर जहाज का पंजीकरण, वार्षिक सर्वेक्षण और हर चार वर्ष में ड्राई डॉक जांच अनिवार्य है। ड्राई डॉक में जहाज के जलमग्न हिस्सों की जांच, जंग रोकथाम और ईंधन दक्षता सुनिश्चित की जाती है। पटना में यह सुविधा उपलब्ध होने से जहाजों को कोलकाता नहीं भेजना पड़ेगा।
गौरतलब है कि विजन-2047 के तहत देश में जलमार्ग से यात्रियों की हिस्सेदारी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
