बिहार सरकार ने बजट 2026–27 में शिक्षा क्षेत्र को सबसे अधिक प्राथमिकता देते हुए बड़ा वित्तीय प्रावधान किया है। वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव द्वारा पेश बजट में शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग के लिए कुल 68,216.95 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह राशि राज्य के अन्य विभागों की तुलना में सबसे अधिक है, जिससे स्पष्ट है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गंभीर है।

बजट भाषण में बताया गया कि कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को लगभग 12.50 करोड़ मुफ्त पाठ्यपुस्तकें और स्कूल डायरी वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य शुरुआती स्तर पर ही छात्रों को बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भी सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। राज्य में 2 लाख 27 हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा 28 हजार से अधिक प्रधानाध्यापकों और करीब 4,700 प्रधानाध्यापक स्तर के शिक्षकों की बहाली की जा रही है। इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होने की उम्मीद है और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार आएगा।
मिड-डे मील योजना (PM-POSHAN) के तहत 68 हजार से अधिक स्कूलों में प्रतिदिन बच्चों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। आने वाले समय में रसोई शेड, भंडारण कक्ष और स्वच्छ पेयजल जैसी सुविधाओं का विस्तार भी किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों की उपस्थिति और पोषण स्तर दोनों में सुधार होगा।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ‘बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ और ‘स्टूडेंट प्रीमियम स्कीम’ के माध्यम से छात्रों को 4 लाख रुपये तक का सस्ती दर पर शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 1 लाख 80 हजार से अधिक छात्र इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। इससे राज्य के युवाओं को पेशेवर और तकनीकी शिक्षा हासिल करने में मदद मिल रही है।
साथ ही, नए मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और पॉलिटेक्निक संस्थानों की स्थापना एवं उन्नयन पर भी विशेष जोर दिया गया है। PM-SHRI स्कूल, मॉडल स्कूल और ‘एक जिला–एक उत्कृष्ट विद्यालय’ जैसी योजनाओं के जरिए स्कूलों को स्मार्ट क्लास, लैब, लाइब्रेरी और खेल सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा।
कुल मिलाकर, बिहार बजट 2026 में शिक्षा को विकास की धुरी मानते हुए व्यापक निवेश का रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।
