शुक्रवार को पटना से होकर गुजरने वाली ट्रेनों के परिचालन पर कोहरे और परिचालनिक कारणों का व्यापक असर देखने को मिला। राजधानी समेत आसपास के स्टेशनों से गुजरने वाली कुल 34 ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चलीं। यह देरी महज कुछ मिनटों की नहीं, बल्कि 45 मिनट से लेकर 28 घंटे 15 मिनट तक दर्ज की गई, जिसने लंबी दूरी के यात्रियों के साथ-साथ रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की दिनचर्या पूरी तरह बिगाड़ दी।
सबसे ज्यादा असर उन ट्रेनों पर पड़ा, जो देश के अलग-अलग हिस्सों को बिहार से जोड़ती हैं। विभूति एक्सप्रेस करीब 15 घंटे 45 मिनट, अप लाइन में चलने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस 13 घंटे 19 मिनट, जबकि संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस 11 घंटे 45 मिनट की देरी से गंतव्य की ओर रवाना हुई। कई यात्रियों को कनेक्टिंग ट्रेनों, बसों और निजी कामों में भारी नुकसान उठाना पड़ा।
कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम रही, जिसके चलते ट्रेनों की रफ्तार सीमित रखनी पड़ी। इसके अलावा, रेलवे नेटवर्क पर दबाव, ट्रैक क्लीयरेंस और समय-सारिणी में असंतुलन जैसे परिचालनिक कारणों ने स्थिति को और जटिल बना दिया। नतीजतन, एक ट्रेन की देरी का असर दूसरी ट्रेनों पर भी पड़ा, जिससे पूरा रूट प्रभावित हुआ।
पटना जंक्शन, दानापुर और राजेंद्र नगर टर्मिनल जैसे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ गई। प्लेटफॉर्म पर लंबे इंतजार, ठंड और सीमित सुविधाओं ने खासतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की परेशानी बढ़ा दी। दैनिक यात्री, जो समय पर दफ्तर या कारोबार के लिए निकलते हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आए।
इस केस स्टडी से साफ है कि सर्दियों में कोहरे के समय बेहतर पूर्व-योजना, रियल-टाइम सूचना तंत्र और वैकल्पिक संचालन रणनीति की जरूरत है। रेलवे द्वारा यात्रा से पहले ट्रेन की स्थिति जांचने की सलाह राहत जरूर देती है, लेकिन यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए सिस्टम स्तर पर और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता भी उतनी ही अहम है।

